भरत तिवारी मुठभेड़ मामले में पहली गोली चलाने वाला एसटीएफ जवान अक्षय कुमार गिरफ्तार

Jul 31, 2026 - 13:34

बंशीधर न्यूज

पटना: बिहार के चर्चित भरत तिवारी मुठभेड़ मामले की जांच में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। विशेष जांच टीम ने बिहार स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के जवान अक्षय कुमार को शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई आरा पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने की। आरा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) राज ने गिरफ्तारी की पुष्टि की है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, अब तक की कार्रवाई में इसे सबसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तारी वैज्ञानिक साक्ष्यों, वीडियो फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर की गई है। जांच में जुटी टीम इन सभी साक्ष्यों का मिलान कर घटना के क्रम की पड़ताल कर रही है। जांच से जुड़े वीडियो साक्ष्यों के आधार पर दावा किया गया है कि घटना के दिन भरत तिवारी ने पुलिस और एसटीएफ टीम के सामने कथित तौर पर आत्मसमर्पण कर दिया था।

आरोप है कि इसके बावजूद सबसे पहली गोली एसटीएफ जवान अक्षय कुमार ने चलाई। पहली गोली लगने के बाद भरत तिवारी जमीन पर गिर पड़े और उसके बाद उन्हें तीन और गोलियां मारी गईं, जिससे उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

यदि जांच में ये आरोप सही साबित होते हैं, तो मामला कथित फर्जी मुठभेड़ और हत्या जैसे गंभीर आरोपों का रूप ले सकता है। फिलहाल जांच एजेंसियां सभी उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित अधिकारियों के बयानों के आधार पर मामले की विस्तृत जांच कर रही हैं।

इस मामले में कार्रवाई उस समय तेज हुई, जब 24 जुलाई को भरत तिवारी के परिजनों ने पटना में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की थी। मुख्यमंत्री ने परिजनों को निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया था, जिसके बाद जांच प्रक्रिया में तेजी आई।

एसटीएफ जवान अक्षय कुमार की गिरफ्तारी के बाद मृतक के परिजनों ने इसे न्याय की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम बताया है। हालांकि उन्होंने कहा कि केवल एक जवान की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है। परिजनों ने मुठभेड़ में शामिल अन्य पुलिस अधिकारियों और कर्मियों की भूमिका की भी जांच कर उनके विरुद्ध हत्या का मामला दर्ज कर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।

उल्लेखनीय है कि इस मामले में अब तक तत्कालीन एसडीएम संजीत कुमार को उनके पद से हटाया जा चुका है। इसके अलावा तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा को भी लाइन हाजिर किया गया है। इन प्रशासनिक कार्रवाइयों के बाद से ही यह माना जा रहा था कि जांच एजेंसियां पुलिस टीम के अन्य सदस्यों की भूमिका की भी जांच कर आगे की कार्रवाई कर सकती हैं।

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