सुमित्रा देवी तीन फरवरी से प्रतिदिन लगातार 12 घंटे तक कर रही हैं यज्ञ मंडप की परिक्रमा
सतबहिनी झरना तीर्थ आस्था, विश्वास और तपस्या का अनुपम केंद्र बना
अभिषेक पांडेय
कांडी : सतबहिनी भगवती के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मनौती अवश्य पूरी होती है। यही कारण है कि वर्ष भर श्रद्धालुओं का यहां आगमन बना रहता है। मनौती मांगने और उसके पूर्ण होने पर छोटे-बड़े अनुष्ठान, जप-तप एवं धार्मिक कर्मकांड कराने की परंपरा यहां प्राचीन काल से चली आ रही है। इधर मानस महायज्ञ के आयोजन से यज्ञ भगवान की कृपा भी इस आस्था से जुड़ गई है, जिससे श्रद्धालुओं का विश्वास और अधिक दृढ़ हुआ है।
प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु सतबहिनी झरना तीर्थ में आयोजित मानस महायज्ञ में भाग लेकर अपनी मनोकामनाएं यज्ञ भगवान और सतबहिनी भगवती के चरणों में अर्पित करते हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार यहां श्रद्धा और विश्वास के साथ मांगी गई मनौती कभी निष्फल नहीं जाती। इसी आस्था का जीवंत उदाहरण 26 वें मानस महायज्ञ के दौरान देखने को मिल रहा है।
खुटहेरिया गांव निवासी सुमित्रा देवी पति राजेंद्र प्रसाद यज्ञ के प्रथम दिवस तीन फरवरी से प्रतिदिन लगातार 12 घंटे यज्ञ मंडप की परिक्रमा कर रही हैं। वह यज्ञ के समापन दिवस तक इसी तरह निरंतर परिक्रमा करने का संकल्प ली हैं। परिक्रमा के माध्यम से उन्होंने यज्ञ भगवान से एक विशेष मनौती मांगी है। सुमित्रा देवी का कहना है कि उन्हें पूर्ण विश्वास है कि यज्ञ भगवान से मांगी गई उनकी मनौती अवश्य पूरी होगी। उन्होंने बताया कि मनौती पूर्ण होने के बाद वे अखंड परिक्रमा करेंगी।
परिक्रमा के दौरान यज्ञ समिति के स्वयंसेवक उन्हें पानी, फल आदि उपलब्ध कराते हैं, जिन्हें वे चलते-चलते ही ग्रहण करती हैं। सुमित्रा देवी की यह कठिन साधना और अटूट श्रद्धा श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। उनकी भक्ति लोगों को आस्था, धैर्य और विश्वास की प्रेरणा दे रही है। सतबहिनी झरना तीर्थ इन दिनों आस्था, विश्वास और तपस्या का अनुपम केंद्र बन गया है।
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