ऑनलाइन फार्मेसी और कॉरपोरेट नीति के विरोध में दवा दुकानें बंद, राज्यभर में दिखा असर

May 20, 2026 - 19:03
ऑनलाइन फार्मेसी और कॉरपोरेट नीति के विरोध में दवा दुकानें बंद, राज्यभर में दिखा असर

बंशीधर न्यूज

रांची: ऑल इंडिया ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ़ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स और झारखंड केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन (जेसीडीए) के संयुक्त आह्वान पर बुधवार को राजधानी रांची सहित झारखंड के अधिकांश थोक और खुदरा दवा प्रतिष्ठान बंद रहे। राष्ट्रव्यापी बंद के समर्थन में राज्यभर के दवा दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद रखीं, जिसके कारण लोगों को जरूरत पड़ने पर अस्पतालों की फार्मेसी दुकानों से दवाएं खरीदनी पड़ीं।

हालांकि सरकारी और निजी अस्पतालों में संचालित मेडिकल स्टोरों को इस बंद से अलग रखा गया था, ताकि मरीजों को जरूरी दवाओं की उपलब्धता बनी रहे। झारखंड ड्रगिस्ट एंड केमिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश कार्यालय सचिव संजीव बनर्जी ने बताया कि यह बंद मुख्य रूप से तीन प्रमुख मांगों को लेकर आयोजित किया गया है और झारखंड में इसका व्यापक असर देखने को मिला।

उन्होंने कहा कि आंदोलन का मुख्य उद्देश्य ऑनलाइन फार्मेसी के अनियंत्रित विस्तार तथा कॉरपोरेट कंपनियों की कथित शोषणकारी मूल्य निर्धारण नीति के खिलाफ आवाज उठाना है। संजीव बनर्जी ने कहा कि कोरोना काल के दौरान केंद्र सरकार के निर्देश पर दवाओं की होम डिलीवरी की व्यवस्था शुरू की गई थी। उस समय परिस्थितियों को देखते हुए केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने सरकार के निर्णय का समर्थन किया था, लेकिन यह व्यवस्था अब भी जारी है और इसके तहत कई तरह की अनियमितताएं सामने आ रही हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बिना पर्याप्त सत्यापन के दवाइयों की बिक्री कर रहे हैं, जिससे एक ही प्रिस्क्रिप्शन का बार-बार उपयोग हो रहा है। इसके अलावा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित फर्जी प्रिस्क्रिप्शन के जरिए एंटीबायोटिक और नशीली दवाओं की उपलब्धता बढ़ रही है, जिससे एंटी माइक्रोबियल रेसिस्टेंस (एएमआर) का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

एसोसिएशन ने बड़े कॉरपोरेट घरानों पर डीप डिस्काउंटिंग के जरिए बाजार का संतुलन बिगाड़ने का भी आरोप लगाया। संजीव बनर्जी ने कहा कि आवश्यक दवाओं की कीमतें पहले से ही सरकार द्वारा नियंत्रित हैं, इसके बावजूद बड़ी कंपनियां अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा कर रही हैं। इसका सबसे अधिक असर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के दवा विक्रेताओं पर पड़ रहा है, जिनका व्यवसाय संकट में आ गया है।

एसोसिएशन के नेताओं ने केंद्र सरकार से जीएसआर 220 ई को रद्द करने की मांग की। उनका कहना है कि यह प्रावधान ऑनलाइन दवा बिक्री को अनुमति देता है, जिससे नकली दवाओं के बाजार में पहुंचने का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने सरकार से दवा कारोबार में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और पारंपरिक दवा विक्रेताओं के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।

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