सरकारी पैसे से बनी सुविधा पर निजी घेराबंदी, यात्रियों को हो रही परेशानी
दबंग के कब्जे में बस स्टैंड का सामुदायिक शौचालय
बंशीधर न्यूज
विश्रामपुर : एनएच-39 पर विश्रामपुर प्रखंड के पिपरा गांव स्थित बस स्टैंड पर यात्रियों और स्थानीय लोगों की सुविधा के लिये जिला परिषद की निधि से सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया गया था। शौचालय के सुचारू रूप से संचालन के लिये वहां डीप बोर कर पानी की भी व्यवस्था की गई थी।
शुरुआती दिनों में यह शौचालय सड़क के बगल में खुले स्थान पर था और बस स्टैंड आने-जाने वाले लोगों के लिये राहत की जरूरी सुविधा बना हुआ था। लेकिन समय बीतने के साथ यह सार्वजनिक व्यवस्था कथित तौर पर एक दबंग परिवार के कब्जे में सिमट कर रह गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रभावशाली व्यक्ति सत्यदेव प्रसाद ने निजी जमीन पर बने इस सामुदायिक शौचालय को अपनी निजी संपत्ति की तरह घेर लिया है।
पहले शौचालय के आसपास निर्माण कराया गया, फिर पूरे परिसर में विशाल भवन खड़ा कर दिया गया और शौचालय को उसी भवन के एक कमरे में सीमित कर दिया गया। इसका नतीजा यह हुआ कि बस स्टैंड के यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिये बनी यह सुविधा अब लगभग बंद हो चुकी है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी पैसे से बनने वाली योजनाओं का उद्देश्य आम लोगों को सुविधा देना होता है, न कि किसी एक व्यक्ति की निजी जागीर बनाना। नियमों के अनुसार यदि किसी निजी जमीन पर ऐसी सार्वजनिक योजना का निर्माण किया जाता है तो उस जमीन को राज्यपाल के नाम दानपत्र (डीड) करना अनिवार्य होता है, ताकि वह पूरी तरह सामुदायिक उपयोग के लिये सुरक्षित रहे।
लेकिन यहां नियमों की अनदेखी कर सामुदायिक शौचालय को ही निजी कब्जे में लेने का आरोप लगाया जा रहा है। स्थानीय लोगों ने इस मामले की शिकायत बीडीओ से भी की है। उनका कहना है कि जिस तरह से शौचालय के चारों ओर विशाल भवन का निर्माण किया गया है, उससे आशंका है कि आने वाले समय में सामुदायिक शौचालय को पूरी तरह खत्म कर उस जगह को निजी भवन में बदल दिया गया।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि शौचालय के साथ लगाया गया डीप बोर, जो यात्रियों और ग्रामीणों की सुविधा के लिये था, अब कथित तौर पर उसी परिवार की निजी जरूरतों के लिये इस्तेमाल हो रहा है। दरअसल सामुदायिक शौचालय उन जगहों पर बनाये जाते हैं जहां लोगों के पास व्यक्तिगत शौचालय की सुविधा नहीं होती।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत इसका उद्देश्य खुले में शौच को खत्म करना और लोगों को स्वच्छता की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना है। बस स्टैंड, बाजार और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर बने ऐसे शौचालय आम जनता के लिये जरूरी सार्वजनिक व्यवस्था माने जाते हैं। बीडीओ राजीव सिंह ने इसकी जांच कर सम्बंधित विभाग को भेजने की बातें कही है।
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