पैसे के खेल में बदला उपाध्यक्ष का समीकरण, तारा देवी की तिकड़म कामयाब

Mar 16, 2026 - 21:15
पैसे के खेल में बदला उपाध्यक्ष का समीकरण, तारा देवी की तिकड़म कामयाब

घोषणा के बाद रणक्षेत्र बना प्रखंड कार्यालय

उपाध्यक्ष बनते ही भड़का विवाद, पैसे लेकर वोट नहीं देने का आरोप

हारे पक्ष के समर्थकों ने की धक्का-मुक्की, पत्रकारों से भी दुर्व्यवहार

वेणुगोपाल

विश्रामपुर : नगर परिषद में उपाध्यक्ष पद के चुनाव के बाद सोमवार को प्रखंड कार्यालय का माहौल अचानक तनावपूर्ण और अराजक हो गया। अंतिम दौर में पैसों के प्रभाव से उपाध्यक्ष पद का समीकरण बदलने के आरोप लगे और अंततः तारा देवी ने बाजी मार ली। तारा देवी को कुल 12 वोट मिले। 

जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी इलियास अंसारी को 8 वार्ड पार्षदों का समर्थन मिला। सोमवार को जिले की डीसी समीरा एस ने नगर परिषद अध्यक्ष और सभी 20 वार्ड पार्षदों को शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण के बाद उपाध्यक्ष पद के लिये चुनाव कराया गया। मतदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्वाची पदाधिकारी सह डीएसओ प्रीति किस्कू ने तारा देवी को विजयी घोषित करते हुये प्रमाण पत्र सौंपा।

इस दौरान सीओ राकेश तिवारी समेत कई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। घोषणा के बाद बेकाबू हुआ माहौल उपाध्यक्ष पद के परिणाम की घोषणा होते ही प्रखंड कार्यालय परिसर का माहौल अचानक गर्म हो गया। हारे हुये प्रत्याशी इलियास अंसारी के समर्थक आक्रोशित हो उठे और परिसर में जमकर हंगामा करने लगे।

समर्थकों ने आरोप लगाया कि कई वार्ड पार्षदों को उनके पक्ष में मतदान के लिये पैसे दिये गये थे, लेकिन मतदान के समय उन्होंने वादा निभाया नहीं। इसी बात को लेकर समर्थकों ने पार्षदों से दिये गये पैसों की मांग शुरू कर दी, जिससे स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई।

जिला पार्षद और पत्रकारों से भी दुर्व्यवहार

हंगामे के दौरान कुछ लोगों ने वार्ड पार्षदों के साथ दुर्व्यवहार किया। इतना ही नहीं मौके पर मौजूद जिला पार्षद के साथ भी धक्का-मुक्की की गई। जब कुछ पत्रकार पूरे घटनाक्रम को अपने कैमरे में कैद करने लगे तो कुछ असामाजिक तत्वों ने उनका मोबाईल छीनने की भी कोशिश की।

पुलिस बनी रही मूकदर्शक

घटना के समय प्रखंड परिसर में पुलिस बल मौजूद था। लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पुलिसकर्मी लंबे समय तक मूकदर्शक बने रहे और हालात बिगड़ते देखते रहे। बाद में स्थिति ज्यादा बिगड़ने पर पुलिस ने बीच-बचाव कर मामले को शांत कराने की कोशिश की। उपाध्यक्ष चुनाव के बाद सामने आये इन आरोपों और हंगामे ने विश्रामपुर नगर परिषद की राजनीति में पैसे के प्रभाव और सियासी जोड़-तोड़ पर कई सवाल खड़े कर दिये हैं।

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